Saturday, May 2, 2026

"मरना" ~ कवि उदय प्रकाश और निहित व्यंग्यकार

कवि की कविता है —

आदमी
मरने के बाद
कुछ नहीं सोचता।

​आदमी
मरने के बाद
कुछ नहीं बोलता।

​कुछ नहीं सोचने
और कुछ नहीं बोलने पर
आदमी
मर जाता है।
🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜
Source: https://www.hindwi.org/kavita/marna-uday-prakash-kavita 

व्यंग्य —
पर 
मरने के,
अपने फायदे हैं!

मारा हुआ —जीव 

सबको थोड़ा अधिक 
आता है —पसंद, 
जल्दी पा जाता है 
सर्वोच्च —स्थान और सम्मान,
रेहता है याद भी थोड़ा ज्यादा —
किसी 
बोलते और सोचते हुए 
"मनुष्य" से!

तो बेहतर है ना,
मर जाना —
रोज़ - रोज़ कुछ,
बोलने और सोचने से,
बचने के लिए? 

Source: राजकमल प्रकाशन समूह (Facebook page)

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