कवि की कविता है —
मरने के बाद
कुछ नहीं सोचता।
आदमी
मरने के बाद
कुछ नहीं बोलता।
कुछ नहीं सोचने
और कुछ नहीं बोलने पर
आदमी
मर जाता है।
🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜
Source: https://www.hindwi.org/kavita/marna-uday-prakash-kavita
व्यंग्य —
पर
मरने के,
अपने फायदे हैं!
मारा हुआ —जीव
सबको थोड़ा अधिक
आता है —पसंद,
जल्दी पा जाता है
सर्वोच्च —स्थान और सम्मान,
रेहता है याद भी थोड़ा ज्यादा —
किसी
बोलते और सोचते हुए
"मनुष्य" से!
तो बेहतर है ना,
मर जाना —
रोज़ - रोज़ कुछ,
बोलने और सोचने से,
बचने के लिए?
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